अल्‍लाह का चैलेंजः कुरआन में विरोधाभास नहीं

लेखकों कुरआन पर लिख कर देखो, कुछ ऐसी बात प्रस्तुत करो कि करोडों मुसलमान हिल जायें, आप भी जगप्रसिद्ध हो जाओगे, अब कुरआन पर कलम उठाने में भाषा बाधा नहीं है,75 भाषाओं में इस्लाम पर जानकारियां उपलब्ध हैं, हिन्दी,तमिल,मलयालम और इंग्लिश सहित 40 भाषाओं कुरआन का अनुवाद उपलब्ध है। हिन्दी अनुवाद सहित pdf फाइल को भी डाउनलोड किया जा सकता है, फिर भी हिन्दी में लिखने वाले छानबीन करके कुरआन के बारे में कुछ प्रस्‍तुत नहीं कर पा रहे, सैंकडों साल(लगभग1430) से कुरआन में एक भी ऐसी बात तलाश ना करसके कि जिससे मुसलमान इन्‍कार ना करसकें, सच्चाई से क्यूं मुंह ना छिपाओ, आओ करोडों मुसलमान आपके लेख का इंतजार कर रहे हैं,

‘क्या वे क़ुरआन में सोच-विचार नहीं करते? यदि यह अल्लाह के अतिरिक्त किसी और की ओर से होता, तो निश्चय ही वे इसमें बहुत-सी बेमेल बातें पाते।‘ -सूरःनिसा  (कुरआन 4:82 )
Do they not ponder about the Qur'an? Had it been from any other than Allah, they would surely have found in it much inconsistency. (Quran: 4:82)
 بھلا یہ قرآن میں غور کیوں نہیں کرتے؟ اگر یہ خدا کے سوا کسی اور کا (کلام) ہوتا تو اس میں (بہت سا) اختلاف پاتے (٨٢)


उपरोक्‍त कुरआन की सूरत आपको चैलेंज करती है कि कुरआन में विरोधाभास ढूंड कर दिखादो,

अधिकतर लेखक भाई क़ुरआन शब्द को कुरान लिखकर अपने विचार प्रस्तुत करते रहे, हम यह सोच के हंसते रहे कि जो किसी पुस्तक का ठीक से नाम नहीं जानता उसकी बातों में किया खाक दम होगा। अल्लाह का चैलेंज कि कुरआन में कोई रददोबदल नहीं कर सकता, अपनी हार स्वीकार करने के बजाये नाम में परिवर्तन करके प्रचलित किया हुआ है। आओ मिलकर इस्लाम मिटायें, इस्लाम की जान कुरआन में और इसमें ऐसी बहुत सी बातें हैं जिनपर लेखकों को छानबीन करनी चाहिये, बस इतना करना है कि जो कुरआन कहता है आप उसे उलटा साबित करके दिखायें, नही कर सकते , क्‍यूंकि है ही नहीं कोई छेद, कुछ सूरतें जिन पर विचार करें
जैसा कि
अनुवादः ‘इसमें कोई संदेह नहीं कि यह (कुरआन) संसारों के पालनहार का उतारा हुआ है। इसे अमानतदार फरिश्ते ने (ऐ मुहम्मद!) तुम्हारे दिल पर उतारा है, ताकि तुम (लोगों को आखिरत के अजाब से) खबरदार करने वाले बनो साफ सुथरी अरबी भाषा में’।-- कुरआन-शुअरा 192-195

इस सूरत में यह साबित करो कि अरबी भाषा साफ सुथरी नहीं है, रसूल के दिल पर अर्थात याद नहीं कराई गई बल्कि थमा दी गई,

‘आज मैंने तुम्हारे लिए ‘दीन’ को मुकम्मल कर दिया और तुम पर अपनी नेमत पूरी कर दी।’-माइदः 7

‘और यह लोग कहते हैं कि उसके उपर पूरा कुरआन एक ही बार में क्यों नहीं उतार दिया गया? तो हम उसे इसी तरह थोडा-थोडा करके उतार रहे हैं, ताकि उसके ज़रिये तुम्हारे दिल को मज़बूत करते रहें और हमने इसे पूरे प्रबन्ध के साथ ठहर-ठहर कर सुनाया है।’ --अल-फुर्क़ानः33

‘एक ऐसी किताब, जिसके विषय आपस में मिलते-जुलते और बार बार दुहराये हुए हैं’- जूमर 23

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ऐसे दूसरे चैंलेंज

खुदा का चैलेंज पूरी मानव-जाति को
http://islaminhindi.blogspot.in/2009/02/1-7.html

अल्‍लाह का चैलेंज है कि कुरआन में कोई रद्दोबदल नहीं कर सकता। #3-7
http://islaminhindi.blogspot.in/2009/02/3-7.html

खुदाई चैलेंज: यहूदियों (इसराईलियों) को कभी शांति नहीं मिलेगी’’
http://islaminhindi.blogspot.in/2009/02/3-7.html


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इस्‍लाम से संबन्धित हिन्‍दी फोंट और पी. डी. एफ. में 30 पुस्‍तकें




"IS THE QURAN GOD'S WORD?" प्रश्‍न के जवाब में डाक्‍टर नाइक का लेक्‍चर  इंग्लिश और उर्दू के बाद अब हिंदी में  भी आनलाइन

 


नोट किसी किताब को डाउनलोड या मंगाने में परेशानी हो तो इ मेल किजिए umarkairanvi@gmail.com 

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अल्‍लाह का चैलेंजः आसमानी पुस्‍तक केवल चार # 5-7

कुरआन का अध्‍यण करें तो पता चलेगा कि सहीफों के अलावा आसमानी किताब केवल चार है, उनमें केवल कुरआन हमेशा वेसा ही रहेगा जैसा था,,,
कुरआन अल्‍लाह की भेजी आखरी किताब है। पहले नबी हजरत आदम थे । इसाई ,यहूदी धर्म भी अल्लाह की भेजी किताबों पर आरम्भ हुआ था। इन तिनों धर्मों का एक संयुक्‍त नाम इब्राहीमी धर्म Abrahamic religions  भी है,

. जैसे जैसे मानव सभ्य और सुसंस्कार और बुद्धिमान होता गया वैसे वैसे वह उसको हिदायत करता रहा,  कुरआन लगभ 23 साल में आखरी पेगम्‍बर मुहम्मद स. को याद कराया गया, अल्लाह ने कोई तैयार पुस्तक नहीं थमा दी। बल्कि थोडा-थोडा हिस्‍सा उनको फरिश्‍ते के द्वारा याद कराया जाता,, फिर वो अपने साथियों को याद करा देते,,, ऐसे हजारों हाफिज साथ साथ तैयार होते रहे,,,,,साथ-साथ रमजान में जितना कुरआन आ चुका होता उसे एक हाफिज सुनाता और बाकी सुनते,,,, मुहम्मद साहब ने आखरी रमजान में दो बार मुकम्‍मल कुरआन रमजान में सुनाया। यह याद करने और सुनाने का सिलसिला आज भी जारी है। इसी सीने या मस्तिष्क में याद रखे जाने के सबब भी इसमें छोटा सा मात्राओं में विभिन्नता जैसा परिवर्तन भी कभी ना होसका। मुहम्‍मद सल्‍ल़ के  थोडे समय पश्चात जब अरब में भी कागज का प्रचलन हुआ  तब उस लाखों के याद किए हुए को किताबी शकल दे दी गयी,,,उससे बहुत आसानी हुई,  दुनिया भर में भेजना आसान हुआ,, उस समय के दो कुरआन आज भी महफूज हैं,,,,आज इन्टरनेट में लगभग सभी बडी भाषाओं में अनुवादित और आधुनिक शक्‍लों यान‍ि पी़ डी एफ और फलेश में भी उपलब्ध है। लेकिन वो हिफज याद यानि कंठस्‍थ रखने का सिलसिला जारी है रहेगा,,,

Tarawih

Wikipedia:>>>
 Sunnah salat and Ramadan.

कुरआन ने अपनी असल हिदायत को पिछली हिदायतों और किताबों ही का एक नया संस्करण कहा है। तीन किताबों की किताबे इलाही-आसमानी किताब अर्थात उसके (अल्लाह) द्वारा भेजी गयी मानता है।
अल्लाह उन पुस्तकों के बारे में कहता हैः
अनुवादः-  Quran - 42:13

‘‘अल्लाह ने तुम्हारे लिए वही धर्म निर्धारित किया जिसकी ताकीद उसने नूह को की थी।" और वह (जीवन्त आदेश) जिसकी प्रकाशना हमने तुम्हारी ओर की है और वह जिसकी ताकीद हमने इबराहीम और मूसा और ईसा को की थी यह है कि "धर्म को क़ायम करो और उसके विषय में अलग-अलग न हो जाओ।" बहुदेववादियों को वह चीज़ बहुत अप्रिय है, जिसकी ओर तुम उन्हें बुलाते हो। अल्लाह जिसे चाहता है अपनी ओर छाँट लेता है और अपनी ओर का मार्ग उसी को दिखाता है जो उसकी ओर रुजू करता है


वह पुस्तक हैं तौरात, इन्जील और ज़बूर। तौरात (जीवस बुक)-मूसाMoses के नाम पर वजूद में आने वाला समुदाय ‘यहूदी’ है जिसने आजकल फिलिस्तीन के हिस्से पर कब्ज़ा करके इसराईल देश बसाया है जिसके बारे में अनेक कारणों से खुदा का कहना है कि यहूदी को कभी शांति नसीब नहीं होने देगा। इन्जील(बाइबल)-ईसा मसीह or यीशु मसीह la:Iesus Christus के ज़रिये ज़ाहिर होने वाला समुदाय ‘ईसाई‘ है। ‘जबूर-दाऊदDavid’ कोई स्थाई पुस्तक नहीं इसकी हैसियत बस तौरात के परिशिष्ट जैसी है। इसे यहूदी और ईसाई दोनों ही मानते हैं।
कुरआन और उसके लाने वाले का उल्लेख का एलान पिछली आसमानी किताबों में पहले ही से हो चुका था। यूहन्ना की इन्जील(बाइबल), अध्याय 16, आयतें 12-13 में यूं लिखा हैः
अनुवादः ‘मुझे तुमसे और भी बहुत सी बातें कहनी हैं, मगर अब तुम उनको सहन नहीं कर सकते, लेकिन जब वह यानी सच्चाई की रूह आएगा, तो तुमको तमाम सच्चाई की राह दिखाएगा, इस लिए कि वह अपनी ओर से न कहेगा, लेकिन जो कुछ सुनेगा, वही कहेगा और तुम्हें आगे की ख़बर देगा।

मौलाना रहमुतल्लाह कैरानवी ने गदर से कुछ पहले आगरा में मशहूर पादरी फंडर के सामने 10 बाइबिले दिखाकर पूछा था कि बताओ इनमें से कौन सी बाइबिल को तुम मानते हो हर एक में अलग कुछ लिखा है। भरे मजमे में उसे कबूल करना पडा था कि ज़रूरत के मुताबिक इसमें परिवर्तन किया गया है। डा. ज़ाकिर नायक भी सैंकडों परिवर्तन साबित कर चुके हैं।
आज जिन किताबों के आसमानी अर्थात ईशवाणी होने का दावा किया जाता है, उनमें बहुत सारे परिवर्तन कर दिये गये हैं। केवल कुरआन ही ऐसी आसमानी किताब है जिसमें कोई परिवर्तन ना किया जासका है ना किया जा सकता है।
कुरआन के बारे में खुली दावत है छानबीन करें। लगभग सभी भाषाओं में कुरआन का अनुवाद मिल जाता है। सबको चाहिए कि इसके औचित्य को जांचने और सच्चाई मालूम करने की कोशिश करे। बुद्धि‍जीवी किसी ऐसी चीज को नज़रन्दाज़ नहीं कर सकता, जो उसके शाश्वत राहत का सामान होने की सम्भावना रखती हो और छान-बीन के बाद शत-प्रतिशत विश्वास में निश्चित रूप से बदल सकती हो।

सोचिये क्या ऐसी वैज्ञानिक व बौधिक दलीलें किसी पुस्तक में मिलती हैं? जैसी कुरआन में हैं। नहीं मिलती तो मान लिजिये कि कुरआन ही निश्चित रूप से खुदाई कलाम अर्थात ईशवाणी है।

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इस्‍लाम की शब्‍दावली
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 (6)

जिन लोगों ने अल्लाह से हटकर अपने दूसरे संरक्षक बना लिए है उनकी मिसाल मकड़ी जैसी है, जिसने अपना एक घर बनाया, और यह सच है कि सब घरों से कमज़ोर घर, मकड़ी का घर ही होता है। क्या ही अच्छा होता कि वे जानते! (Quran 29:41)
The example of those who take allies other than Allah is like that of the spider who takes a home. And indeed, the weakest of homes is the home of the spider, if they only knew. (Quran 29:41)

उपरोक्‍त कुरआन की आयत में सबसे कमजोर मकडी का घर बताया गया है, आगे की साइंस को भी चैलेंज है कि किसी और का मकजोर घर सातिब करे
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जिन लोगों ने अल्लाह से हटकर अपने दूसरे संरक्षक बना लिए है उनकी मिसाल मकड़ी जैसी है, जिसने अपना एक घर बनाया, और यह सच है ...
Posted by Mohammad-umar Kairanvi on Friday, October 9, 2015



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अल्‍लाह का चैलेंज वैज्ञानिकों को सृष्टि रचना बारे में #4-7

कुरआन में कही गई हर बात non-muslim के लिए चैलेंज है, किसी को झुठलाकर दिखादो, मसलन
सृष्टि रचना के बारे में कुरआन में हैः
अनुवादः ‘हमने (अर्थात खुदा ने) हर जानदार को पानी से बनाया है।’ - सूरः अम्बियाः30
‘सूर्य अपने एक मुस्तक़र (ठिकाने) की ओर दौड रहा है, यह सर्वशक्तिमान और हर चीज़ की खबर रखने वाली सता का ठहराया हुआ कानून है, और चांद के लिए हमने मंजिले मुकर्रर कर दी हैं और हरेक अपने विशेष क्षेत्र में बराबर तैरता रहता है।’ - यासीन 39,40
‘बेशक ये सारे आसमान और यह ज़मीन पहले सब के सब आपस में मिले हुए थे, तो हमने उन्हें अलग-अलग किया। -सूरः अम्बियाः30

ये सारी बाते आज साबित हो चुकी हैं। वैज्ञानिक खोजें बता रही हैं कि सृष्टि अपनी आरम्भिक हालत में गैस के खज़ाने की शक्ल में थी, जीवन-स्रोत पानी है, रचानाओं के भीतर ‘जोडे’ का नियम लागू है, चांद और सूर्य और सारे ग्रह अपनी निश्चित धुरियों पर घूम रहे हैं। जिस समय कुरआन मजीद इस विश्वास पूर्ण स्वर में, यह सब कुछ कह रहा था। उस समय (1400 वर्ष पूर्व) के ज्ञान-विज्ञान के जानकारों को इन की कल्पना भी नहीं थी, इन्हें प्रमाणित तथ्य स्वीकार कर लेना तो दूर की बात थी। प्रश्न पैदा होता है कि फिर कुरआन में, सदियों पहले इन ज्ञानपूर्ण तथ्यों का उल्लेख कैसे आया?

सृष्टि अपने वर्तमान रूप में आने से पहले, पुरी की पूरी, एक ही माद्दे (मूल तत्व) के रूप में थी, एक ही प्रकार की एक विशेष वस्तु थी, जो वातावरण में फैली हुई थी। फिर विधाता ने इसे अनेक भागों में बांट दिया और उनसे अनेक ग्रहों के रूप में जन्म लिया। मूल तत्व का स्पष्टीकरण कुरआन की आयत से यह होता है कि यह एक प्रकार का धुआं-गैस था।

कुरआन के बारे में खुली दावत है छानबीन करें। लगभग सभी भाषाओं में कुरआन का अनुवाद मिल जाता है। सबको चाहिए कि इसके औचित्य को जांचने और सच्चाई मालूम करने की कोशिश करे। बुद्ध‍िजीवी किसी ऐसी चीज को नज़रन्दाज़ नहीं कर सकता, जो उसके शाश्वत राहत का सामान होने की सम्भावना रखती हो और छान-बीन के बाद शत-प्रतिशत विश्वास में निश्चित रूप से बदल सकती हो।
हर काव्य से श्रेष्ठ, कोई दूसरा काव्य इसे नीचा नहीं दिखा सकता।
सोचिये क्या ऐसी वैज्ञानिक व बौधिक दलीलें किसी पुस्तक में मिलती हैं? जैसी कुरआन में हैं। नहीं मिलती तो
मान लिजिये कि कुरआन ही निश्चित रूप से खुदाई कलाम अर्थात ईशवाणी है बाकी सब झूठ।


विडियो जो इस्‍लाम और कुरआन को विज्ञान से समझने में आपकी सहायता करेंगी
Sex of the baby (Miracles of Quran hindi)


Miracles of Quran Urdu Part 5-6 (protected roof)



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अल्‍लाह का चैलेंज है कि कुरआन में कोई रद्दोबदल नहीं कर सकता। #3-7

कुरआन में इस बात का एलान है कि इसका कोई अंश नष्ट न हो सकेगा, कभी इसके शब्द आगे-पीछे न हो सकेंगे।
अनुवादः
''निस्सन्देह यह जिक्र अर्थात कुरआन हमीं ने उतारा है और हम निश्चय ही इसे सुरक्षित रखेंगे।’ - सुरः हिज्र 9
As for the Admonition, indeed it is We Who have revealed it and it is indeed We Who are its guardians. ( Quran: 15:9) 
بےشک یہ (کتاب) نصیحت ہمیں نے اُتاری ہے اور ہم ہی اس کے نگہبان ہیں (٩) 
‘यकीनन यह एक किताबे अज़ीज़ है। बातिल (असत्य) न इसके आगे से इसमें राह पा सकता है, न इसके पीछे से।'' - सूरः हाममीम सज्दा

‘किताबे अज़ीज़’ होने का अर्थ यह हुआ कि इसके वजूद को कभी होई हानि नहीं हो सकती, इस के सम्मान को कोई आघात नहीं पहुंचा सकता और इसका रूप और इस की हैसियत किसी भी परिवर्तन की पहुँच से परे है।
दुनिया कि हर किताब अपने मूल रूप में नहीं है सभी में इतने परिवर्तन हो चुके हैं कि कब क्या था यह जानना भी मुश्किल होगया। एकतरफ कुरआन है कि खुदा चैलेंज करता है कि इसमें कोई रद्दोबदल नहीं कर सकता। सारी दुनिया मिल जाये हल्का सा फर्क अर्थात विभिन्नता करके दिखादे।
चोदह सौ से अधिक वर्षां से इस्लाम दुश्मन सब तरह की कोशिश करके देख चुके, नाकाम रहे। आज भी ज्यूँ का त्यूँ है। जैसाकि मुहम्मद स. को लगभग 23 साल में याद कराया गया था।

कुरआन के बारे में खुली दावत है छानबीन करें।
‘क्या वे क़ुरआन में सोच-विचार नहीं करते? यदि यह अल्लाह के अतिरिक्त किसी और की ओर से होता, तो निश्चय ही वे इसमें बहुत-सी बेमेल बातें पाते।‘ -सूरःनिसा  (कुरआन 4:82 )
 लगभग सभी भाषाओं में कुरआन का अनुवाद मिल जाता है। सबको चाहिए कि इसके औचित्य को जांचने और सच्चाई मालूम करने की कोशिश करे। बुद्धि‍जीवी किसी ऐसी चीज को नज़रन्दाज़ नहीं कर सकता, जो उसके शाश्वत राहत का सामान होने की सम्भावना रखती हो और छान-बीन के बाद शत-प्रतिशत विश्वास में निश्चित रूप से बदल सकती हो।

सोचिये क्या ऐसी वैज्ञानिक व बौधिक दलीलें किसी पुस्तक में मिलती हैं? जैसी कुरआन में हैं। नहीं मिलती तो मान लिजिये कि कुरआन ही निश्चित रूप से खुदाई कलाम अर्थात ईशवाणी है।
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कुरआन हिन्‍दी अनुवाद सहित
http://www.quranhindi.com/

क़ुरआन अनेक भाषाओं में हिंदी युनिकोड सहित
http://tanzil.net/#trans/hi.farooq/2:23

Quran in museum in turkey कई दुश्‍मन सलतनतों की पहुंच में रह चुका  यह नुस्‍खा मुहम्‍मद साहब के साथियों द्वारा उनके बाद लिखवाया गया ,,, याद रहे पेगम्‍बर को याद(कंठस्‍थ) कराया गया,,उन्‍होंने 23 साल तक साथ के साथ साथियों को याद कराया, हर साल रमजान में जितना तब का आता उसे एक सुनाता बाकी सुनते,, आखरी रमजान में मुकम्‍मल उन्‍होंने दो बार सुनाया,,, जिसे तरावीह कहते हैं जिसका सिलसिला आज भी जारी
जैसा कि मुसलमान जानते हैं फरिश्‍ता जिब्राईल अ. मुहम्‍मद सल्‍ल. को कुरआन थोडा थोडा याद कराते थे वही आप अपने साथियों को याद करा देते, उसमें जो कातिब अर्थात लिखना जानते थे उस समय के तरीकों पर यानि हडडी खाल पत्‍थर आदि पर लिख लेते थे जिसे खलीफाओं (उत्‍तराधिकारियों) ने जमा किया था, उस कुरआन की दो कापी आज तक सलामत हैं
उस  युग के कुरआन में या आधुनिक इबुक फलैश या आज के छपे कुरआन में कोई विभिन्‍नता कातिब या कम्‍पयूट्राइज कराने में आती है तो यह हाफिज फोरन पकड लेते हैं,,, जिससे आज बात वही बस रंग रोगन के अलावा कोई नई बात नहीं हो पाती

23 साल तक चले इस याद कराने के सिलसिले में ध्‍यान दोगे तो पता चलेगा साथ साथ मुहम्‍मद साहब के हजारों साथी हाफिज तैयार हो चुके थे, और लगभग 23 साल में हर साल रमजान में रात की नमाज के बाद तरावीह Tarawih में पूरा कुरआन सुना जाता था, यानि उस साल जितना कुरआन अल्‍लाह ने फरिश्‍ते जिब्राईल द्वारा भेजा वह सबके साथ दोहरा लिया जाता था, इस तरह से आपने आखिरी दो रमजान में दो बार पूरा का पूरा याद किया हुआ कुरआन अपने साथियों को सुनाया,, जिसे साथियों ने याद कर लिया वो सिलसिला आज तक चला आ रहा है, हजारों हाफिज हर साल तैयार होते हैं
वही हाफिज भी कुरआन को बदलने की कोशिशों को नाकाम बनाने का एक जरिया है, जैसे ही कोई कुरआन में रद्दोबदल करके बाजार में लाएगा फोरन मात्रा बिन्‍दी जैसे फर्क भी पकड लिया जाएगा


महाराष्ट्र के अहमदनगर से पढ़ाई करने के लिए भोपाल आए एक बारह साल के विद्यार्थी ने 5 जुलाई को 12 घंटे में जुबानी पूरी कुरआन सुनाकर रिकार्ड बना दिया।



"IS THE QURAN GOD'S WORD?" प्रश्‍न के जवाब में डाक्‍टर नाइक का लेक्‍चर  इंग्लिश और उर्दू के बाद अब हिंदी में  भी आनलाइन


क्‍या कुरआन ईश्वरीय ग्रन्थ है? पढकर आप भी कहोगे बेश ईश्‍वरीय ग्रंथ है 




दूसरे चैंलेंजस भी पढें

खुदा का चैलेंज पूरी मानव-जाति को

खुदाई चैलेंज: यहूदियों (इसराईलियों) को कभी शांति नहीं मिलेगी’’

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खुदाई चैलेंज: यहूदियों (इसराईलियों) को कभी शांति नहीं मिलेगी’’ #2-7

1400 वर्ष पूर्व अल्लाह ने कुरआन में यहूदियों (इसराईलियों) के बारे में कहा थाः
अनुवादः और याद करो जब तुम्हारे रब ने ख़बर कर दी थी कि वह क़ियामत के दिन तक उनके विरुद्ध ऐसे लोगों को उठाता रहेगा, जो उन्हें बुरी यातना देंगे। निश्चय ही तुम्हारा रब जल्द सज़ा देता है और वह बड़ा क्षमाशील, दावान भी है -सूरः अराफः 7: 167
And [mention] when your Lord declared that He would surely [continue to] send upon them until the Day of Resurrection those who would afflict them with the worst torment. Indeed, your Lord is swift in penalty; but indeed, He is Forgiving and Merciful. (Quran 7:167) 
अमरीका दोस्ती में उन्नती तो मिली शांति नहीं मिली। इस चैलेंज को भी सारी दुनिया मिलके झुटलाने कि कोशिश करले एक छोटे से मुल्क में शांति स्थापित करदे, ऐसा अगर हो जाये जोकि 14 सौ वर्ष से ना होसका तब दुनिया में कहीं फिर मुसलमान नहीं मिलेगा।

यहूदी जाती लम्बे समय से, जिस तरह रह-रह कर ज़लील रूसवा और तबाह बरबाद होती चली आ रही है वह अपनी मिसाल आप है। कभी आशूरियों ने उन्हें कुचला, कभी बाबिल के शासक बख़्ते नस्र ने उनकी ईंट से ईंट बजा कर रख दी, कभी रूमी राजा टटयूस ने उन्हें बरबाद कर दिया, कभी मुसलमानों के हाथों उन्हें क़त्ल, वनवास और दासता की यातनाएं भुगतनी पडीं, कभी हिटलर उन कर क़हर बन कर टूटा। इतिहास यहूदियों की रूसवाइयों और बरबादियों की शिक्षाप्रद घटनाओं से भरा पडा है। आजकल फिलिस्तीनीयों ने उनका जीना हराम कर रखा है। वह कभी अपने चारों तरफ दीवारे करते हैं कभी फिलिस्तीन पर बम्बारी करते हैं। एक फिलिस्तीनी मरता है तो उसके पीछे कितने उसके अज़ीज इसराईल के दुश्मन होजाते हैं जो कियामत तक उसे शांति नही मिलने देंगे। 1400 वर्ष से आज तक और आगे भी कभी इनको शांति नसीब नहीं होगी।

अल्‍लाह ने कुरआन में हमें इनकी सबसे बडी कमजोरी बतायी अर्थात बताया कि यह मौत से भागते हैं,,, अर्थात डरते है
कह दो, "मृत्यु जिससे तुम भागते हो, वह तो तुम्हें मिलकर रहेगी,
 Say, "Indeed, the death from which you flee - indeed, it will meet you. ." (Quran 62:8)
http://tanzil.net/#trans/en.sahih/62:8

कुरआन के बारे में खुली दावत है छानबीन करें। लगभग सभी भाषाओं में कुरआन का अनुवाद मिल जाता है। सबको चाहिए कि इसके औचित्य को जांचने और सच्चाई मालूम करने की कोशिश करे। बुद्धि‍जीवी किसी ऐसी चीज को नज़रन्दाज़ नहीं कर सकता, जो उसके शाश्वत राहत का सामान होने की सम्भावना रखती हो और छान-बीन के बाद शत-प्रतिशत विश्वास में निश्चित रूप से बदल सकती हो।

Quran हर काव्य से श्रेष्ठ, कोई दूसरा काव्य इसे नीचा नहीं दिखा सकता।
सोचिये क्या ऐसी वैज्ञानिक व बौद्धिक दलीलें किसी पुस्तक में मिलती हैं? जैसी कुरआन में हैं।
नहीं मिलती तो मान लिजिये कि कुरआन ही निश्चित रूप से खुदाई कलाम अर्थात ईशवाणी है बाकी सब झूठ।

इस विषय पर और अधिक जानकारी के लिए पढें
अहले किताब (यहूदी और ईसाई) और धार्मिक मानवता के लिए कुरान का सम्मानः एक प्रमाण

response "quran says about non muslims"  for English article:
The Qur’an’s Regard for the People of the Book (Christians and Jews) And the Believing Humanity– A Living Testimony

URL for Urdu article:
اہل کتاب (یہودی اور عیسائی)اور معتقد انسانیت کے سلسلے میں قرآن کا احترام: ایک شہادت


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खुदा का चैलेंज पूरी मानव-जाति को #1-7


लगभग चौदह सौ साल से अल्‍लाह ने कुरआन में मानव जाति को बहुत से चैलेंज किये हुये हैं जिनका हमें क्‍यामत तक इन्‍तजार है।
जैसे कि यह समझें 
कुरआन में अरबी भाषा में 114 सूरतों(अध्‍याय) में से किसी 1 जैसी सूरत, दोबारा ध्‍यान से पढें 114 सूरतें अर्थात नमूनों में से किसी एक जैसी बनाकर या दूसरों की मदद से भी बनवाकर दिखादो का चैलेंज मिलता है,
सूरत को यूं समझें 
कुरआन 114 हिस्सों में बंटा हुआ है, हर हिस्से को सुरः कहते हैं, सूरत ऐसी हैं जो अक्षरों-शब्दों का सार्थक क्रम के साथ जोडकर बनी होती हैं। यह इतनी छोटी भी है कि उसमें दो तीन छोटे-छोटे वाक्यों और चोदह-पन्द्रह शब्दों से अधिक नहीं, मगर छोटी सूरतों के संक्षिप्त होने का कदापि यह अर्थ नहीं कि उसमें वर्णित तत्व भी थोडा है। बडी सूरतों में सत्य-ज्योति की जो किरणें एक विशाल क्षेत्र तक फैली हुई हैं, वही छोटी सूरतों में एक छोटे से क्षेत्र के भीतर सिमट गइ हैं। इन सूरतों की हैसियत ‘सारगर्भित सूक्तियों की-सी है। सबसे छोटी सूरतों में से एक - ध्‍यान दें इस सूरत में केवल 10 शब्‍द हैं sample

कुरआन में खुदा कहता हैः
''कोई शक हो तो इस जैसी कोई एक सूरः बना लाओ और इस उददेश्य के लिए अल्लाह को छोडकर अपने सारे प्रतिनिधियों को भी बुला लो, अगर तुम अपने विचार में सच्चे हो'' -सुरः बक़र: 2:23

And if you are in doubt about what We have sent down upon Our Servant [Muhammad], then produce a surah the like thereof and call upon your witnesses other than Allah, if you should be truthful. (quran 2:23)


अर्थात तुम सब मिलकर और जिस किसी को भी अपनी मदद के लिए बुलाना चाहो, बुला कर कोशिश कर डालो, यहां तक कि पूरी मानव-जाति को इस काम के लिए इकट्ठा कर लेने की तुम्हें पूरी छूट है। अगर तुमने इस तरह के इस चैलेंज का सफल उत्‍तर दे दिया, तो कुरआन का इन्सानी कलाम होना मान लिया जाएगा इसे  ‘कलामे इलाही’ कहते हैं,, आपके लिए बहुत आसान चुनोती है इसे इन्‍सानी साबित करने के लिए।

यह चुनौती आज भी अपनी जगह इसी तरह मौजूद है। सारे विद्वान मिल जाओ और बनादो 114 सूरतों जैसी में से किस‍ि 1 जैसी बनाकर दिखादो विश्‍वास किजिए जो कुरआन की यह चुनौती कबूल करलेगा बडा नाम होगा उसका और उसकी दुनिया दोनों तरह बन जाएगी सूरत बनादी तो सारी इस्‍लामी दुनिया की हार होगी,,, न बना सका तो वो जान जाएगा कि यही हक है,, यही सच है।

इस पर खामखा के प्रयत्न से कई बडे विश्‍व प्रसिद्ध विद्वान हंसी का पात्र बन चुके हैं, सारी अरबी दुनिया के ज्ञानी ध्‍यानी उसके आगे सर झुका रहे हैं कि वाकई हम इसकी चुनौती का जवाब नहीं दे सकते
विचार करो, भागो मत, इकटठा करो सारी दुनिया के अरबी जानकारों को,,, नहीं हैं है तो पैदा करो, इस्‍लाम पर वार करने वालों तुम इन चैलेंजों से क्‍यूं भागते हो? भागकर अपना ही नुक्‍सान कर रहे हो,

प्रयत्न करो खुली चुनौती
विचार करो,
फिर स्‍वीकार करो अब भी समय है मान लो केवल अल्‍लाह सच है

इस बात को विस्‍तार से मगर इंग्लिश में समझने के लिए इधर पढें
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 http://quran-challanges.blogspot.com/2011/05/challange-in-quran-bring-surah-similar.html

अनुवादि‍त कुरआन, पारिभाष‍ि‍क शब्‍दावली एवं विषय सहित
http://www.quranhindi.com/

हिन्‍दी युनिकोड सहित अनेक भाषाओं में क़ुरआन
http://tanzil.net/#trans/en.hilali/2:23

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ऐसे दूसरे चैंलेंज

अल्‍लाह का चैलेंजः कुरआन में विरोधाभास नहीं
http://islaminhindi.blogspot.in/2009/02/blog-post.html

अल्‍लाह का चैलेंज है कि कुरआन में कोई रद्दोबदल नहीं कर सकता। #3-7
http://islaminhindi.blogspot.in/2009/02/3-7.html

खुदाई चैलेंज: यहूदियों (इसराईलियों) को कभी शांति नहीं मिलेगी’’
http://islaminhindi.blogspot.in/2009/02/2-7.html
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